किसी के लिए कितना भी करो शायरी

किसी के लिए कितना भी करो शायरी हिंदी में

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किसी को समझने के लिए एक पल ही काफी है !
वरना उम्र भर काम पद जाती है रिश्ते निभाने के लिए।

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किसी के लिए बेचैन होकर अपने वक़्त को यूँ न काटो !
किस्मत की स्याही है, ज़िनदगी को समेट देगी।

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उसकी वो दर्द भरी बाते !
अक्सर मेरे लबो पे आ जाती है।

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किसी के लिए बार बार मरहम बनकर आखिर मिलता ही क्या है !
कभी कभी किसी के लिए कांटा भी बनना पड़ता है।

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तुम्हारे चेहरे की स्माइल है
तुम्हारी पहचान
इसे खो मत देना किसी बेवकूफ इंसान की वजह से।

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बड़े करीब से देखा है किसी अपने को बदलते हुए,
और वो भी किसी और के लिए।

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किसी के लिए कितना भी करो कोट्स इन हिंदी

ये केसा असर हे तेरे प्यार का,
न मुझे तेरा होने देता है,
और न ही किसी और का।

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अगर तू करता ही था मुझसे इतना ही प्यार,
तो सोचा क्यों नहीं, दिल दोतने से पहले एक बार,
क्या कमी रह गई मेरी मोहब्बत में,
जो तुझे लेना पड़ा किसी दूजे का साथ।

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किसी ने थोड़ा सा अपना वक़्त दिया था मुझे,
मेने आज तक उसे संभल कर रखा है।

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उसे पाने की कोशिश में खुद से खुद को खो दिए है हम,
पर क्या पता था उन्हें कदर नहीं हमारी,
उनसे दिल लगा कर दिल से रो दिए है हम।

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किसी को फूल देना मोहब्बत नहीं,
उसे फूल की तरह रखना मोहब्बत है।

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मेसेज न करने पर शायरी

मैं खुद ही पलट कर नहीं देखा उसको,
वरना ज़िन्दगी दूर तलाक आई मेरे पीछे पीछे।

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मैंने मौत को करीब से देखा है,
मरना तो छोड़ो, मुझे तो मोत ने भी ज़िंदा दफ़न होते देखा है।

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बहुत मुश्किल से समझाया है खुद को,
तू अब मेरा नहीं किसी और का हो गया।

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मुझे छोड़ दिया कोई बात नहीं,
हम दुआ करेंगे की तुम्हे कोई न छोड़े
किसी और के लिए।

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अधूरे ख्वाब मेरे सपने मेरे सो गए,
हम तुम्हारी राह देखते रहे,
और तुम किसी और के हो गए।

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मोहब्बत यू ही किसी से हुआ नहीं करती,
वजूद भूलना पड़ता है, किसी को चाहने के लिए।

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आप की कमी शायरी

एक धुन में निकल आये घर से किसी और के लिए,
वह किसी और के घर चला गया किसी और के लिए।

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ज़िन्दगी इस तरह मोड़ बदलती है की अच्छे अच्छा को मिटटी में मिला देती है।
जिसका कोई भरोसा नहीं दे सकते।

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मेरा हक़ नहीं है तुम पर मैं यह जानती हूँ,
फिर भी ना जाने दुआओ में तुझको ही मांगती हु।

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मैं किसी से बेहतर करू, क्या फ़र्क़ पड़ता है,
मैं किसी को बेहतर करू, बहुत फरक पड़ता है।

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तुम्हारी कमी शायरी

अब में क्या कहु तुझे,
की तेरी नज़र में उठने के लिए,
मुझे मेरी ही नज़रों में गिरना पड़ता है।

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बेवफाई क्या चीज़ होती है जनाब,
हम तो तुम्हे अपनी वफाओ से तबाह कर देंगे।

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वो आसान समझते थे, मोहब्बत मेरी,
फरमाते थे हंसकर वो देखकर हालत मेरी,
शबाब वो जानते तो शायद करते अजीज,
ये दिल था जो करता था जो करता था हर आलम इबादत तेरी।

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