Rahat Indori Shayari, Rahat indori shayri

Rahat Indori Shayari Best Shayari

Rahat Indori Best Shayari, Top Famous Shayari, राहत इंदोरी कि शायरी…

Rahat indori best shayari ke bare me kuch khaas baate

  • दोस्तो अगर आप शायरीयांं पसन्द है तो एसा हो ही नही सकता की आप राहत इंदोरी साहाब को नही जानते होंगे । क्युकि राहत इंदोरि सहाब ने शायरी कि दुनिया मे जो नाम कमाया है शायाद ही किसी ने कमाया होगा । Dr. Rahat Indori Sahab ने उर्दु मे भी शायरी की दुनिया मे महारत हासिल की हुई है । डॉ राहत इंदोरी सहाब का जन्म 1 जनवरी 1950 मे मध्य प्रदेश के इंदोर जिले मे हुआ था । इन्के पापा का नाम रफतुल्लाह क़ुरेशी था ।
  • उन्होंने मध्य प्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
  • तो आज मे आपके सामने राहात इंदोरी शायर की सब्से ज्यादा पसंद करने वाली शायरी लेकर आया हु ।
Rahat Indori Shayari
Rahatindorishayari.com

Rahat Indori best 2 Line Shayari

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए

मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

Rahat Indori Shayari in 2 Lines

सूरज सितारे चाँद मिरे सात में रहे
जब तक तुम्हारे हात मिरे हात में रहे

कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है

दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए

वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए

अजनबी ख़्वाहिशें , सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे ,  कि उड़ा भी न सकूँ

Best Of Rahat Indori Best Shayari

आँख में पानी रखो , होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो , तरकीबें बहुत सारी रखो

रोज़ तारों को नुमाइश  में , खलल पड़ता हैं
चाँद पागल हैं , अंधेरे में निकल पड़ता हैं

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