Gulzar Poetry in hindi
Gulzar Shayari

Gulzar Shayari in Hindi

ग़ुल्ज़ार के नाम से कोन वाकिफ नही होगा । अगर आप भी गुल्ज़ार सहाब के फेन है तो चलिये साथ मे बेठ कर पड़ते है गुल्ज़ार की शायरी हिंदी मे ।

Gulzar Shayari in Hindi

Gulzar shayari
Gulzar shayari in hindi

1. हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है;
जिस तरफ़ भी चल पड़ेगे, रास्ता हो जाएगा।

2. अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो।

3. मालूम है दुनिया को ये ‘हसरत’ की हक़ीक़त;
ख़ल्वत में वो मय-ख़्वार है जल्वत में नमाज़ी।

4. लूम है दुनिया को ये ‘हसरत’ की हक़ीक़त;
ख़ल्वत में वो मय-ख़्वार है जल्वत में नमाज़ी।

5. मालूम है दुनिया को ये ‘हसरत’ की हक़ीक़त;
ख़ल्वत में वो मय-ख़्वार है जल्वत में नमाज़ी।

Gulzar Quotes In Hindi

Guljar shayri hindi me
Gulzar shayari in hindi

6. उदास लम्हों की न कोई याद रखना;
तूफ़ान में भी वजूद अपना संभाल रखना;
किसी की ज़िंदगी की ख़ुशी हो तुम;
बस यही सोच तुम अपना ख्याल रखना।

7. इस नए साल में ख़ुशियों की बरसातें हों;
प्यार के दिन और मोहब्बत की रातें हों;
रंजिशें नफ़रतें मिट जायें सदा के लिए;
सभी के दिलों में ऐसी चाहते हों!

8. उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो;
जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो;
इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है;
इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो।

9. ख़बर नहीं थी किसी को कहाँ कहाँ कोई है;
हर इक तरफ़ से सदा आ रही थी याँ कोई है;
यहीं कहीं पे कोई शहर बस रहा था अभी;
तलाश कीजिये उसका अगर निशाँ कोई है।

10. हर बार मेरे सामने आती रही हो तुम;
हर बार तुम से मिल के बिछड़ता रहा हूँ मैं;
तुम कौन हो ये खुद भी नहीं जानती हो तुम;
मैं कौन हूँ ये खुद भी नहीं जानता हूँ मैं।

Gulzar Poetry in Hindi Font

Gulzar shayari on Life
Gulzar shayari on Life

11. कुछ मैं भी थक गयी हूँ उसे ढूँढ़ते-ढूँढ़ते;
कुछ ज़िंदगी के पास भी मोहलत नहीं रही;
उसकी एक-एक अदा से झलकने लगा था खलूस;
जब मुझ को ही ऐतबार की आदत नहीं रही।

12. कागज़ की कश्ती से पार जाने की ना सोच;
चलते हुए तुफानो को हाथ में लाने की ना सोच;
दुनिया बड़ी बेदर्द है, इस से खिलवाड़ ना कर;
जहाँ तक मुनासिब हो, दिल बचाने की सोच।

13. सामने मंज़िल थी और पीछे उसका वजूद;
क्या करते हम भी यारों;
रुकते तो सफर रह जाता चलते तो हमसफ़र रह जाता।

14. सियासी आदमी की शक्ल तो प्यारी निकलती है;
मगर जब गुफ़्तगू करता है चिंगारी निकलती है;
लबों पर मुस्कुराहट दिल में बेज़ारी निकलती है;
बड़े लोगों में ही अक्सर ये बीमारी निकलती है।

15. जाने क्या सोच के लहरे साहिल से टकराती हैं;
और फिर समंदर में लौट जाती हैं;
समझ नहीं आता कि किनारों से बेवफाई करती हैं;
या फिर लौट कर समंदर से वफ़ा निभाती हैं।

Guljar shayri

Shayari on life Gulzar poetry
Shayari on life Gulzar poetry

16. जहाँ याद न आये तेरी वो तन्हाई किस काम की;
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की;
बेशक़ अपनी मंज़िल तक जाना है हमें;
लेकिन जहाँ से अपने न दिखें, वो ऊंचाई किस काम की।

17. जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की;
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की;
बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है;
पर जहाँ से अपने ना दिखें वो उँचाई किस काम की।

18. प्यार में कोई तो दिल तोड़ देता है;
दोस्ती में कोई तो भरोसा तोड़ देता है;
ज़िंदगी जीना तो कोई ग़ुलाब से सीखे;
जो खुद टूट कर दो दिलों को जोड़ देता है।

19. सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन, न थी तेरी अंजुमन से पहले;
सज़ा खता-ए-नज़र से पहले, इताब ज़ुर्मे-सुखन से पहले;
जो चल सको तो चलो के राहे-वफा बहुत मुख्तसर हुई है;
मुक़ाम है अब कोई न मंजिल, फराज़े-दारो-रसन से पहले।

20. मंज़िलों के ग़म में रोने से मंज़िलें नहीं मिलती;
हौंसले भी टूट जाते हैं अक्सर उदास रहने से।

Gulzar Shayari on Life

Gulzar Poetry in hindi
Gulzar Poetry in hindi

21. फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में;
फर्क होता है किस्मत और लकीर में;
अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना;
कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

22. लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया;
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया;
पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा;
दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।

23. इस डूबी हुई नाव का किनारा हो तुम;
मेरी ज़िंदगी का आखिरी अंजाम हो तुम;
यूँ तो हर मुश्किल को पार करने की हिम्मत है मुझमे;
बस तुम को खोने के अंजाम से डरते हैं हम।

24. रहिये अब ऐसी जगह चलकर, जहाँ कोई न हो;
हम सुख़न कोई न हो और हम ज़ुबाँ कोई न हो;
बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाना चाहिए;
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो;
पड़िए गर बीमार, तो कोई न हो तीमारदार;
और अगर मर जाइए, तो नौहाख़्वाँ कोई न हो।

25. बेचैन बहुत फिरना घबराये हुए रहना;
इक आग से जज्बों की भड़काए हुए रहना;
आदत ही बना ली है तुम ने तो मुनीर अपनी;
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना!

Gulzar Shayri in hindi

Gulzar Shayri in hindi
Gulzar Shayri in hindi

26. तुमने चाहा है मुझे ये करम क्या कम है;
तुम प्यार करते हो मुझसे ये भरम क्या कम है;
एक दिन ये भरम टूटेगा मेरा,
उफ़ किस्मत का ये सितम क्या कम है

27. हर मुस्कुराहट से सरगरनी है;
क्या यही आलिम जवानी है;
आ तुझे एक राज़ बतलाऊं,
मैं भी फ़ानी हूँ, तू भी फ़ानी है।

28. हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे,
तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर;
ए दिल! तुझे दुश्मनों की पहचान कहाँ,
तू हल्क़ा-ए-यारां में भी मोहतात रहा कर।

29. कोई गुजराती बचा लाया;
कोई बिहारी बचा लाया;
कोई तेलुगुओं के लिए हाहाकार करने लगा;
इसी गहमा-गहमी में हिन्दुस्तानी बह गया।

30. रूह के रिश्तों की ये गहराइयाँ तो देखिये;
चोट लगती है हमें और चिल्लाती है माँ;
चाहे हम खुशियों में माँ को भूल जायें दोस्तों;
जब मुसीबत सर पे आ जाए, तो याद आती है माँ।

Shayari Gulzar

Gulzar Love shayari
Gulzar Love shayari

31. लगे है फोन जबसे तार भी नहीं आते;
बूढी आँखों के अब मददगार भी नहीं आते;
गए है जबसे शहर में कमाने को लड़के;
हमारे गाँव में त्यौहार भी नहीं आते।

32. सरहदों पर बहुत तनाव है क्या;
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या;
खौफ बिखरा है दोनों समतो में;
तीसरी समत का दबाव है क्या।

33. सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा;
इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जायेगा;
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है;
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।

34. एक ही चौखट पे सर झुके;
तो सुकून मिलता है;
भटक जाते हैं वो लोग;
जिनके हजारों खुदा होते है।

35. वो ज़ालिम मेरी हर ख्वाहिश ये कह कर टाल जाता है;
दिसम्बर जनवरी में कौन नैनीताल जाता है;
मुनासिब है कि पहले तुम भी आदमखोर बन जाओ;
कहीं संसद में खाने कोई चावल दाल जाता है।

Two Line Gulzar Shayari

Two Line Gulzar Shayari
Two Line Gulzar Shayari

36. आँख में पानी रखो, होठों पे चिंगारी रखो;
ज़िंदा रहना है तो, तरकीबें बहुत सारी रखो;
ले तो आये शायरी बाज़ार में राहत मियाँ;
क्या ज़रूरी है की लहजे को भी बाज़ारी रखो।

37. हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली;
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली;
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ;
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली।

38. खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं;
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।

39. कुछ इस तरह मैंने;
जिंदगी को आसां कर लिया;
किसी से माफ़ी मांग ली;
किसी को माफ़ कर दिया।

40. जलते घर को देखने वालों, फूस का छप्पर आपका है;
आपके पीछे तेज़ हवा है, आगे मुकद्दर आपका है;
उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था, मेरा नम्बर अब आया;
मेरे क़त्ल पे आप भी चुप है, अगला नंबर आपका है।

Gulzar shayari on life

Gulzar shayari on life
Gulzar shayari on life

42. यूनानी मिश्र और रोमी सब मिट गये जहाँ से;
अब तक मगर हैं बाकी नाम-ओ-निशा हमारा;
कुछ बात हैं के हसती मिटती नहीं हमारी;
सदियों रहा हैं दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा।

43. हम उबलते हैं तो भूचाल उबल जाते हैं;
हम मचलते हैं तो तूफ़ान मचल जाते हैं;
हमें बदलने की कोशिश करनी है ऐ दोस्तों;
क्योंकि हम बदलते हैं तो इतिहास बदल जाते है।

44. आओ झुक कर सलाम करें उनको;
जिनके हिस्से में यह मुकाम आता है;
खुशनसीब होता है वो खून;
जो देश के काम आता है।

45. ग़ज़लों का हुनर साकी को सिखायेंगे;
रोएंगे मगर आँसू नहीं आयेंगे;
कह देना समंदर से हम ओस के मोती हैं;
दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आयेंगे।

Gulzar Ki Shayari

Gulzar Ki shayari
Gulzar Ki shayari

46. बीत गया है, जो साल भूल जाइये;
इस नए साल को पूरे मन से गले लगाइये;
मांगते हैं दुआ हम रब से सर झुका कर;
नए साल के सारे सपने पूरे हो जाए आपके।

47. निगाहों में मंज़िल थी;
गिरे और गिर कर संभलते रहे;
हवाओं ने तो बहुत कोशिश की;
मगर चिराग आँधियों में भी जलते रहे।

48. जली रोटियों पर बहुत शौर मचाया तुमने;
माँ की जली उँगलियों को देख लेते तो;
भूख ही उड़ गई होती।

49. शाम सूरज को ढलना सिखाती है;
शम्मा परवाने को जलना सिखाती है;
गिरने वाले को तकलीफ तो होती है मगर;
ठोकर इंसान को चलना सिखाती है।

50. अगर कुछ सीखना ही है;
तो आँखों को पढ़ना सीख लो;
वरना लफ़्ज़ों के मतलब तो;
हजारों निकाल लेते है।

दोस्तो अगर आपको गुल्ज़ार सहाब की यह शायरी पसंद आइ हो तो आप इसे अपने दोस्तो के साथ ज़रुर से शेयर करेंं ।

हमने इस वेबसाइट पे ओर भी शायरी डाल रखी है आप उनहे भी पड़ सकते है ।

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